अंतरराष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस आज

International Girl Child Day Today

हर साल 11 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस ‘मनाया जाता है।विश्वभर में प्रथम अंतरराष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस 11 अक्टूबर 2012 को मनाया गया था। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वो दिन है जिसमें लड़कियों के लिए अधिक अवसरों का समर्थन किया जाता है।

इस वर्ष का थीम किशोर लड़की की शक्ति- 2030 की दृष्टि है। आज बालिका हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है लेकिन वह अभी भी अनेक कुरीतियों का शिकार हैं।आज भी हज़ारों लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही या तो मार दिया जाता है या जन्म लेते ही लावारिस छोड़ दिया जाता है। भारत में करीब आधी लडकियां आज भी ऐसी हैं, जिनकी शादियाँ 18 साल के पहले हो जाती हैं। इन शादीशुदा लडकियों में से क़रीब एक चौथाई ऐसी हैं, जो 18 साल के पहले माँ बन जाती हैं।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत की गई थी। जिसमें घटते बालिका अनुपात और जीवन चक्र पर देश के 161 जिलों में योजना शुरू की गई। आज करीब ढाई साल हो चुके हैं और अब तक 104 जिलों में कन्या शिशु जन्म अनुपात में वृद्धि की प्रवृत्ति देखी गई है।

भारत में इस साल महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 9 से 14 अक्टूबर के बीच बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ सप्ताह मना रहा है।जिसका विषय नए भारत की बेटियां है। वहीं दिल्ली स्थित विभिन्न देशों के दूतावास और उच्चायोग 11 अक्टूबर को ‘अंतरराष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस’ के अवसर पर एक संयुक्त बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस के अवसर पर हम सभी ये संकल्प लेते हैं कि हम बालिकाओं- महिलाओं की उन्नति के अधिक से अधिक अवसर उत्पन्न करने का प्रयास करेंगे।

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