भारत हिंसा की किसी भी कार्रवाई का समर्थन नहीं करता है

India does not support any action of violence

भारत ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकियों को सुरक्षित शरण प्रदान करने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की है।

भारत ने रोहिंग्या शरर्णाथियों और जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख जैद-राद-अल-हुसैन की आलोचना को पुरजोर ढंग से खारिज कर दिया है। जिनेवा में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजीव के. चंद्र ने कहा कि मानवाधिकार उच्चायुक्त की टिप्पणियां उस आजादी और अधिकारों की अनुचित विवेचना है जो एक जीवंत लोकतंत्र का हिस्सा है।

चंद्र ने कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका, प्रेस की आजादी, वृहद सिविल सोसायटी और कानून के सम्मान एवं मानवाधिकारों के मुल्यों पर गर्व है। के. चंद्र ने कहा कि भारत हिंसा की किसी भी कार्रवाही का समर्थन नहीं करता है।

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा है कि जम्मू और कश्मीर की सुरक्षा के लिए खतरा माने जा रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर कार्रवाई की जाएगी। जम्मू और कश्मीर के दौरे पर गए राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र का अवैध प्रवासियों के प्रति कड़ा रुख है, लेकिन देश में विस्थापित लोगों और पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के प्रति सहानुभूति वाला दृष्टिकोण है जो देश में शरणार्थी बन गए हैं।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकियों को सुरक्षित शरण प्रदान करने के लिए पाकिस्तान की आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 36वें सत्र में राइट-टू-रिप्लाई के अधिकार का उपयोग करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन के फर्स्ट सेक्रट्री सुमित सेठ ने कहा कि आतंकवाद मानवाधिकार का अत्याधिक उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सबसे ज्यादा मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। सेठ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में वर्तमान स्थिति के लिए पाकिस्तान की सीमावर्ती आतंकवाद का हाथ है।

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