भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2017- देश के वन और वृक्ष क्षेत्र में आठ हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक की बढ़ोतरी

India Forest Status Report-2007

भारत के वन और वृक्षावरण क्षेत्र में 2015 कि तुलना में 8,021 कि.मी की वृद्धि हुई है। प्रतिशत में देखें तो यह वृद्धि 1.14% की है। अच्छी बात यह है कि सघन वन में 1.36% की वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि अत्यंत सघन वन, वातावरण से सबसे अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड अवशोषित करते हैं। जैव विविधता से समृद्ध कच्छ या मैंग्रोव वनों में भी 181 वर्ग कि.मी की वृद्धि हुई है।

दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन भारत वन स्थिति रिपोर्ट -2017 जारी करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं और खासकर उज्जवला योजना ने वन सरंक्षण में अहम भूमिका निभाई है। केंद्र सरकार की उज्जवला योजना के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गैस चूल्हों का उपयोग बढ़ा है जिसके फलस्वरूप जलावन की लकड़ी के लिए जंगल को क्षति पहुंचना कम हुआ है।

डॉ. हर्ष वर्धन ने केंद्र की महत्वकांक्षी ‘हरित राष्ट्रीय राजमार्ग (वृक्षारोपण एवं अनुरक्षण) नीति का भी जिक्र किया जिसके तहत नेशनल हाईवे के दोनों किनारों पर 1,40,00 कि.मी. वृक्ष कतारे विकसित करने की योजना है।

बांस की महता एवं उस पर सरकार के जोर को देखते हुए इस 2017 के वन स्थिति रिपोर्ट में बांस पर एक अलग अध्याय दिया गया है। इसके अनुसार देश का कुल बांस धारित क्षेत्र 15.69 मिलियन हेक्टेयर का है। 2011 की तुलना में देश के बांस धारित क्षेत्र में 1.73 मिलियन हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। गौरतब है कि हाल ही में सरकार ने संसद में बांस को वृक्ष की श्रेणी से बाहर करने संबंधि बिल प्रस्तुत किया है। बांस के वृक्ष की श्रेणी से बाहर हो जाने पर लोग अपनी नीजि भूमि में बांस उगाने के लिए प्रेरित होंगे।

पांच शीर्ष राज्य जहां वनावरण में सर्वाधिक वृद्धि हुई है वे हैं आंध्र प्रदेश, कर्णाटक, केरल, ओडिशा एवं तेलंगाना। देश के 12 मैंग्रोव वनों वाले राज्यों में 7 राज्यों में सकारात्मक वृद्धि हुई है। मैंग्रोव वनों में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज करने वाले राज्य महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश औऱ गुजरात हैं। हालांकि मिजोरम, नागालैण्ड, अरूणाचल प्रदेश, त्रिपुरा एवं मेघालय में वनावरण को नुकसान पहुंचा है। इसकी मुख्य वजह झूम खेती, विकासात्मक गतिविधियां एवं अन्य जैविक दबाव को बताया गया है।

ज्ञात हो कि देश में वन और वृक्षावरण क्षेत्र की विस्तृत ब्योरा देने वाली भारत वन स्थिति रिपोर्ट हर दो वर्ष में जारी होती है।

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